भैया एक गजब को कांड हो ग्यो है! इस बार भारत सरकार ने जॉन लप्पड़ मारो है पाकिस्तान को, उसको कोई मुकाबलो नहीं ! पढ़लो, सच्ची के रिया हूँ! जाकी गूँज दिल्ली से होते हुए इस्लामाबाद, पेशावर और काबुल तक सुनाई दे री है!
पिछले साल जून के करीब, क़ाबुल और दिल्ली के बीच हवाई रास्ते से माल ढुलाई के सीधे कॉरिडोर की शुरुआत की खबर आई थी. उस समय खबर को सिर्फ खबर समझकर पढ़ लिया और भुला दिया गया लेकिन वाकई दाद देनी होगी सरकार की कि उन्होंने उस ख़बर को समाचार के पन्नो तक ही अटकाए नहीं रखा.
पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ के हवाले से खबर है कि काबुल में पिछले दो सालों में पाकिस्तानी बाजार की हिस्सेदारी में 50 फीसदी से अधिक की गिरावट आ गई है. इस गिरावट की वजह काफी दिलचस्प है क्योंकि पाकिस्तान की 50 फीसदी हिस्सेदारी छीनने वाला देश कोई और नहीं भारत है.
पहले प्रत्येक वर्ष हजारों अफगान चिकित्सकीय उपचार के लिए पेशावर जाते थे लेकिन अब वे सस्ती उपचार और रियायती उपचार जैसे अन्य आकर्षण के कारण भारत को पसंद करते हैं.
जी हाँ! भारत ने अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के कारोबार का लगभग आधा मार्केट शेयर अपने हिस्से कर लिया है. इस खबर की पुष्टि करने वाले भी कोई और नहीं पाकिस्तान-अफगानिस्तान जॉइंट चैंबर ऐंड इंडस्ट्री के चेयरमैन जुबैर मोतीवाला हैं! उन्होंने कहा कि, अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का व्यापार पिछले दो सालों में 2.7 बिलियन डॉलर से घटकर 1.2 अरब डॉलर पर आ गया है. साथ ही काबुल में आटा, पुरुषों व महिलाओं के कपड़े और लाल मांस के पारंपरिक बाजार भी उनके हाथों से छिनते जा रहे हैं.

मोतीवाला का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के बाजार में पकड़ बनाने के लिए भारत सब्सिडी वाले दर पर सामान बेच कर रहा है और अफगानी व्यापारियों को 75 फीसदी छूट के साथ हवाई टिकट भी दे कर रहा है. इसके अलावा अफगानी व्यापारी मुफ्त बहु-वीजा के साथ भारत में पुलिस की जांच के बिना आसानी से यात्रा कर पा रहे हैं.
काबुल सदियों से पाकिस्तानी निर्यात के लिए प्राकृतिक बाजार रहा है, लेकिन अब भारत से सस्ते उत्पादों की बाढ़ के कारण माहौल बदल चुका है. पहले प्रत्येक वर्ष हजारों अफगान चिकित्सकीय उपचार के लिए पेशावर जाते थे लेकिन अब वे सस्ती उपचार और रियायती उपचार जैसे अन्य आकर्षण के कारण भारत को पसंद करते हैं. पेशावर के चिकित्सा, पर्यटन, जो मुख्यत: अफगानों के कारण डटे हुए थे, अब शून्य स्तर पर है.
आगे उन्होंने कहा कि, पेशावर अफगानिस्तान के साथ बर्बाद हुए व्यापार का मुख्य शिकार है क्योंकि वहां के लोगों ने बड़े पैमाने पर अपना कारोबार खो दिया है. उन्होंने कहा कि 200 आटा मिलों में से करीब 100 बंद कर दी गई हैं क्योंकि अफगानिस्तान में आटा के निर्यात में भारी गिरावट आई है. कल तक पाकिस्तान काबुल में शलवार कमीज़ का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था, लेकिन अब यहाँ भी भारत ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए पारंपरिक रूप से पाकिस्तानी उत्पादों की आपूर्ति शुरू कर दी है.
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ये इंडिया है….भौंडेपन के साथ मार्केटिंग की जाये तो प्रोडक्ट जल्दी बिकता है.


