एलिजा आर्मस्ट्रांग केस: जब एक एडिटर ने कानून बदलवाने की लड़ाई लड़ी!


Photo credit: Melissa Segal

टाइटैनिक की आपदा में करीब 1500 लोगों ने अपनी जान गवाई थी. इन 1500 लोगों में जैक, रॉस डेविट, काल हॉकली, मौली ब्राउन, रुथ डेविट, कैप्टेन स्मिथ, जैसे नामों से आप भली-भांति वाकिफ होंगे क्योंकि इन सबको आप टाइटैनिक फ़िल्म में देख चुके हैं या देख लेंगे. लेकिन इन सब नामों के बीच एक नाम इतना बड़ा था, जिसने एक समय विक्टोरियन सोसाइटी के पैरों तले जमीन खिसका दी थी, बावजूद उसे फिल्म में कहीं नहीं दिखाया गया है. यह व्यक्ति न्यूयॉर्क के कार्नेगी हॉल में एक सम्मेलन को संबोधित करने के लिए टाइटैनिक से यात्रा कर रहा था.


पत्रकार जेएल गार्विन टाइटैनिक की उस आपदा को याद करते हुए कहते कि “दोपहर में ऑक्सफ़ोर्ड की सड़कों पर घूमते हुए जब टाइटैनिक की खबर सुनी तब सबसे पहले केवल विलियम थॉमस स्टेड का नाम ही सुनाई दिया.”

विलियम थॉमस स्टेड एक खोजी पत्रकार थे जिन्होंने अपने जीवनकाल में कईं तफ्तीशों को अंजाम दिया लेकिन “एलिज़ा आर्मस्ट्रांग केस” एक ऐसी तफ्तीश थी जिसके बाद पूरा विश्व उन्हें जानने लगा और इसी घटना की वजह से आज भी टाइटैनिक के अति स्मरणीय मृतकों में उनका नाम सबसे पहला होता है.

विलियम थॉमस स्टेड, खोजी पत्रकार

तो गुरु, आइए हम भी इतिहास की सबसे चर्चित और हिंदी पट्टी में पहली बार पेश की जा रही विलियम थॉमस स्टेड की उस तफ़तीश से आपको रूबरू करवाते हैं.

आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1885

यूनाइटेड किंगडम के इतिहास में, महारानी विक्टोरिया के जन्म(1837) से लेकर उनके निधन(1901) तक के कालखंड को ‘विक्टोरियन युग’ के नाम से जाना जाता है. विक्टोरियन युग के दौरान यूनाइटेड किंगडम के देशों में ‘आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1885’ का भयंकर बोल-बाला था. इस कानून के तहत लड़कियों की ‘Age Of Consent’ 13 वर्ष तय की गई थी. ‘Age Of Consent’ यानि वह उम्र जब किसी व्यक्ति को यौन कृत्य करने के लिए कानूनी रूप से सक्षम माना जाता है और इस प्रकार एक व्यक्ति की न्यूनतम आयु जिसके साथ दूसरे व्यक्ति को यौन गतिविधि में संलग्न होने की अनुमति है. भारत में फ़िलहाल ‘Age Of Consent’ 18 वर्ष है.

‘आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1885’ ने लड़कियों को 13 साल की उम्र में अपनी यौन गतिविधि के बारे में खुद फैसले लेने का अधिकार दिया था. साथ ही इसका पालन नहीं करने वालों के लिए सख्त दंड का प्रावधान था. कुल मिलाकर इस कानून का पालन नहीं हुआ तो कोई राहत नहीं मिलनी है.

लड़कियों में नासमझी और परिपक्वता की कमीं की इस छोटी सी उम्र में यौन सम्बंधित बड़े निर्णयों के अधिकार देने की वजह से यूनाइटेड किंगडम में लड़कियों को बस एक प्रॉडक्ट के रूप में समझा जाने लगा और मासूम बच्चियों की खरीद-फरोख्त ने ज़ोर पकड़ा. मानो इस कानून से माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए और अनुबंध करवा के लड़कियों को खरीदना-बेचना सब क़ानूनी हो गया. इस कारण वेश्यावृत्ति के बाज़ारों में वर्जिन लड़कियों की मांग और आपूर्ति दोनों में तेजी आ गई.

इस दौरान, यूनाइटेड किंगडम के विविध समूहों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनता द्वारा इस कानून का पुरजोर से विरोध हुआ. आंदोलन भी हुए जिसमें ‘सोशल प्यूरिटी मूवमेंट’ सबसे चर्चित समूह था. सबकी मांग थी कि ‘Age Of Consent’ को 13 से बढ़ाकर 16 कर दी जाए लेकिन यूनाइटेड किंगडम की संसद ने इस बदलाव पर सोचने तक की दिलचस्पी भी नहीं दिखाई.

नतीजतन, ‘सोशल प्यूरिटी मूवमेंट’ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ‘आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1885’, यह बाल-वेश्यावृत्ति का समर्थन करता है इस बात को सबके सामने सार्वजानिक तौर पर नंगा करने की ठान ली और इसके लिए बेंजामिन स्कॉट जो की लंदन सिटी के चैमबलेन(यूरोप की कचहरियों का एक बड़ा अधिकारी) थे उन्होंने खोजी पत्रकारिता के सबसे बड़े नाम और पॉल मॉल गैज़ेट के संपादक विलियम थॉमस स्टेड को चुना.

विलियम थॉमस स्टेड और एलिजा आर्मस्ट्रांग

चूँकि विलियम थॉमस स्टेड पहले से ही ‘सोशल प्यूरिटी मूवमेंट’ के समर्थक थे, उन्होंने बेंजामिन स्कॉट के काम को शुरू करने में तनिक भी देरी न करते हुए एक विशेष और गुप्त समिति की स्थापना की जिसमें जोसेफिन बटलर, लंदन समिति के प्रतिनिधि और सैलवेशन आर्मी के सदस्य थे. साथ ही जाँच पड़ताल और अनुसंधान के लिए दो महिलाएं, पॉल मॉल गैज़ेट का एक कर्मचारी और सैलवेशन आर्मी से एक लड़की इस कार्य में शामिल थे. जोसेफिन बटलर अपने बेटे जॉर्गी के साथ लंदन की सड़कों पर दस दिन तक घूमते रहे और यहाँ उन्होंने वेश्याओं, वेश्यालयों, दलालों, खरीददारों, बचाव कार्यकर्ताओं के बारे में कईं महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित की. इन सब के बाद वह पड़ाव आया जो इतिहास में कुछ लोगों के लिए कांड, कुछ लोगो के लिए कलंक तो कुछ लोगों के लिए खोजी पत्रकारिता की चरम जैसे वाक्यांशों से जाना जाता है.

दरअसल, शुरूआत में प्राप्त जानकारियों के बावजूद स्टेड संतुष्ट नहीं हो पा रहे थे. कानून के तहत आसानी से बच्चों को अनैतिक उद्देश्यों के लिए खरीदा-बेचा जा सकता है यह साबित करने के लिए उन्होंने एक लड़की को खरीदने का निश्चय किया और इसके लिए उन्होंने एक वेश्यालय की मालकिन रेबेका जेरेट से संपर्क किया.

रेबेका जेरेट के संपर्क सूत्रों से उन्हें 13 वर्ष की एलिजा आर्मस्ट्रांग के बारे में मालूम हुआ जिसकी शराबी माँ एलिज़ाबेथ को पैसों की जरुरत थी. रेबेका को लग रहा था कि एलिज़ाबेथ को ख्याल आ जाएगा कि वह अपनी बेटी को वेश्यावृत्ति के लिए बेच रही है फिर भी उसने एलिज़ाबेथ का मन रखने के लिए कहा कि, एलिजा को एक बुजुर्ग सज्जन के वहां नौकरानी के काम के लिए भेजा जा रहा है. इस पर एलिज़ाबेथ ने हामी भी भर दी और इस तरह एक माँ ने अपनी बेटी को 5 पाउंड में बेच दिया. 5 पाउंड यानि आज के 453 रुपए.

एलिजा के मिल जाने के कुछ ही दिनों में स्टेड ने उसे सैलवेशन परिवार के सानिध्य में फ्रांस भेज दिया और वह इस पुरे घटनाक्रम को प्रकाशित करने में जुट गया.

द मेडेन ट्रिब्यूट ऑफ़ मॉडर्न बेबीलोन
Maiden Tribute headlines, Pall Mall Gazette
Copyright Westminster City Archives

सोमवार 4 जुलाई 1885 के दिन, वि.टी स्टेड ने पॉल मॉल गैज़ेट में इस पूरे प्रकरण की पहली किश्त को ‘द मेडेन ट्रिब्यूट ऑफ़ मॉडर्न बेबीलोन’ के शीर्षक तले प्रकाशित किया. इस क़िस्त को 6 पन्नों में समाया गया और टकटकी बांध लेने वाले भारी-भरखम तीखे और कटाक्ष भरे शब्दों से उन लोगों पर हमले किए जो ‘Age Of Consent’ को बढ़ाने का रोड़ा बने बैठे थे. साथ ही स्टेड ने टिप्पणी की कि, 12 व् 13 वर्ष के बच्चे किसी भी तरह से गंभीर प्रतिरोध नहीं कर सकते.

वि.टी स्टेड की ‘द मेडेन ट्रिब्यूट ऑफ़ मॉडर्न बेबीलोन’ कहानी के बाद एकाएक पॉल मॉल गैज़ेट हिट हो गया. कुछ प्रभावी समाचारपत्र बेचने वालों ने स्टेड की इस कहानी को भद्दा और नीच अभिलाषा करार देते हुए बेचने से किनारा कर लिया लेकिन फिर भी भारी संख्या में भीड़ पॉल मॉल के कार्यालयों के सामने इकट्ठा हो गई और इसकी सेकंड हैंड कॉपियां भी सामान्य कीमत से बारह गुना ज्यादा दाम में बिक रही थीं. आलम ये था कि कुछ ही दिनों के भीतर स्टेड को अटलांटिक के पार से भी टेलीग्राम आना शुरू हो गए.

कहानी के अंत तक तो मानो स्टेड ने विक्टोरियन सोसाइटी को वेश्यावृत्ति के कोलाहल में झौंक दिया था. यूनाइटेड किंगडम में राष्ट्रीय पैमानों पर दंगे होने लगे जिस वजह से स्टेड पर भी प्रकाशन को स्थगित करने का दबाव बनाया गया लेकिन स्टेड अपनी बात पर अड़े रहे “अगर बिल विलंब के बिना पारित हो जाएगा तो वह सबकी बातों का पालन करेगा अन्यथा प्रकाशन जारी रहेगा.”

विक्टोरियन युग में गूंजे इतने ऊँचे स्वर को देखकर विरोध करने वाले भी हिल गए. गाँवों, कस्बों, शहरों सभी जगह बैठकें होने लगी और बिल के बिना किसी विलंब के पारित होने की मांग को दोहराया जा रहा था. परिणामस्वरूप, सरकार ने भी जनता के मिजाज को भाँपा और बुधवार 8 जुलाई को विधेयक पर बहस शुरू हुई फिर 7 अगस्त को उसने अपनी तीसरी और आखिरी सुनवाई को पार कर किया और एक हफ्ते बाद संसद में पारित हो गया.

लेकिन यहाँ से एक और कहानी की शुरुआत हुई.

पॉल मॉल गैज़ेट के प्रतिद्वंद्वी अखबारों ने एलिज़ा और उसकी माँ को ढूंढ निकाला और यह भी उजागर किया कि वि.टी स्टेड ही एलिज़ा का खरीददार था. एलिज़ा की माँ ने पुलिस को बताया कि, उसने अपनी बच्ची को वेश्यावृत्ति के लिए नहीं बेचा था. वह समझती थी कि एलिज़ा से घरेलु काम करवाएं जाएंगे. और तो और इस मामले में एलिज़ा के पिता की अनुमति नहीं ली गई थी.

एलिज़ा की माँ के इस बयान के बाद, स्टेड, रेबेका जेरेट और अन्य पांच को एलिज़ा के माता-पिता के समझौते के बिना उस पर हमला और अपहरण के आरोप लगे और उनपर मुकदमा चला.

23 अक्टूबर 1885 के रोज, स्टेड ने कोर्ट में स्वीकार किया कि “लड़की को पिता की सहमति के बिना खरीदा गया था और मां को भुगतान का कोई लिखित दस्तावेज नहीं है.” इस प्रकार स्टेड, जेरेट और मौरेज को अपहरण और खरीद का दोषी पाया गया और दूसरों को बरी कर दिया गया. जेरेट और मौरेज को छह महीने जेल की सजा सुनाई गई और स्टीड को तीन महीने की सजा सुनाई गई.

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