अभिषेक बच्चन की ‘रन’ याद है? उसमें कौआ बिरयानी वाले विजय राज को छोटी गंगा बताकर एक आदमी नाले में कुदवा देता है! उसका नाम…. पंकज त्रिपाठी है! उस दौरान आपने उस किरदार को उतनी तवज्जो नहीं दी होगी लेकिन कुछ समय बाद जब यही आदमी अग्निपथ, गैंग्स ऑफ वासेपुर, गुंडे, मसान, न्यूटन, फुकरे जैसी फिल्मों में दिखने लगा तो उसके अभिनय को परखकर आप सोच रहे होंगे कि “ये कौन आदमी है? इतना दमदार अभिनय, इतनी सादगी, इतना समर्पण लेकिन बॉलीवुड की किसी पत्रिका या किसी गॉसिप-शो में उसके नाम की चर्चा तक नहीं है. ऐसा क्यों? क्यों इतना बड़ा स्टार बन जाने के बावजूद उसके ट्विटर से वो ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ क्यों नहीं टपकती जो स्वरा भास्कर, सोनम कपूर, नेहा धूपिया, अक्षय कुमार, सलमान खान और कंगना रनौत जैसे सेलेब्स के ट्विटर प्रोफाइल से टपकती है.

ऐसा इसलिए क्योंकि पंकज त्रिपाठी ने अपने आप को पीआर एजेंसियों के मायाजाल से दूर रखा हुआ है. एक इंटरव्यू के दौरन उन्होंने कहा “बाज़ारवाद का दौर है. अभी, इस दौर में ना…आप प्रोडक्ट है, हर अभिनेता. मुझे प्रोडक्ट बनना पसंद नहीं है, कि मैं एक पीआर एजेंसी को हायर करूँ और अख़बार में छपूं कि मैं पतला हो गया, मैं मोटा हो गया या मैं इस रोल के लिए वेट बढ़ा रहा हूँ. एक अभिनेता का काम है कि उसको जो रोल मिले उसके लिए मेहनत करे, प्रिपरेशन करे. वो खबर देना का क्या काम है. हर अभिनेता करता है.”

आगे उन्होंने जोड़ा “ये बाज़ारवाद का दौर है. प्रोडक्ट बनो. आपको हर चौथे दिन छपना है, कहीं दिखना है, लोगों को. मुझे भी बोलते हैं लोग, पीआर हायर करो. कुछ करो. मुझे लगता है, मैं चाहता हूँ, मुझे ना, मेरे काम से लोग याद करें! चर्चित हो जाऊंगा पीआर एक्टिविटी कर के, पेपर में छप के, यादगार नहीं होऊंगा! यादगार मैं अपने काम से होऊंगा. चर्चित दो दिन में खत्म हो जाएगा. आज पेपर में छपूंगा, 10 दिन बाद कोई और छपेगा. लोग भूल जाएंगे. लेकिन काम से अगर लोगो की मनःस्मृति में छप जाऊंगा, लोगों की यादों में छप जाऊंगा तो पीढ़ी दर पीढ़ी चलूँगा.”

तो जैसा की पंकज त्रिपाठी ने कहा, ये बाज़ारवाद का दौर है और इस दौर में हर अभिनेता व अभिनेत्री इस बाजार में टिके रहना चाहते हैं. और बाज़ार के कम्पटीशन के लिए वे हायर करतें हैं ‘पीआर एजेंसियां’.

पीआर एजेंसियों को हायर करने के बाद से ही अभिनेता व अभिनेत्रीयां सर्कस के उस पशु की भाँति बर्ताव करने लगते हैं जिनकी लगाम रिंग-मास्टर के हाथ में होती है और रिंग मास्टर यानि पीआर एजेंसियों के कहने पर ये सेलेब्स तरह-तरह के सर्कस करतें हैं ताकि वे चर्चा में बने रहें.

ये पीआर एजेंसियां मौजूदा परिस्थितियों में कौनसा स्टंट्स करना है और कैसे करना है इसकी बाकायदा तालीम देतीं हैं और फिर ‘फ्रीडम ऑफ़ च्वॉइस’ के नाम पर सेलेब्स नाचने लग जाते हैं! कंट्रोवर्सी होती है, लम्बे-लम्बे लेख छपते हैं, टीवी इंटरव्यूज होते हैं. सब फोकट में! और फ़ोकट में ना हो तो ये पीआर एजेंसियां थोड़ा बहुत पेड़-मार्केटिंग करने में भी नहीं हिचकिचाती! तो भला, और चाहिए ही क्या! मार्किट में बने रहने के लिए इतना बहुत है साहब!

यहाँ तक की ये एजेंसियां अपने क्लाइंट्स के लिए ‘नेगेटिव मार्केटिंग’ करने से भी परहेज नहीं करतीं. अभी मार्च महीने की ही बात है. ऋतिक रोशन ने एक पीआर एजेंसी को ‘उनके नाम का गलत उपयोग’ करने पर जमकर लताड़ा था.

दरअसल, हुआ कुछ ऐसा कि इन दिनों ऋतिक रोशन बिहार के जाने-माने गणितज्ञ, प्रोफेसर और सुपर-30 के संस्थापक आनन्द कुमार की बायोपिक पर काम कर रहें हैं! हालाँकि आनंद कुमार कॉन्ट्रोवर्सी में घिर गए हैं. इस फिल्म में ऋतिक के अपोसिट ‘कुमकुम भाग्य फेम’ मृणाल ठाकुर बहुत पहले ही कास्ट की जा चुकी थी लेकिन इसी बीच सारा अली खान की पीआर एजेंसी ने चाबुक घुमाया और खबर फैला दी कि ‘ऋतिक के साथ सारा ‘सुपर-30′ में नजर आ सकती हैं.’ और तो और खबर को इस तरह से फैलाया गया कि ऋतिक 19 साल छोटी लड़की के साथ काम करने के लिए डेस्परेट हैं.


Hrithik Roshan Sara Ali Khan Controversy
स्क्रीन -शॉट: webdunia.com से  

इस सर्कस की जानकारी मिलते ही ऋतिक ने कहा कि “अपने नए क्लाइंट्स को प्रमोट करने की ख़ातिर मेरे नाम का उपयोग करने की ओछी हरकत मुझे बिल्कुल भी परेशान नहीं करतीं हैं! लेकिन मैं उनको बताना चाहता हूँ कि इससे काम नहीं चलेगा. इसलिए मैं आपको एक टिप देता हूँ – अपने क्लाइंट के टैलेंट पर ट्रस्ट करें और चालाकियाँ बंद करें. यह सब तब हो रहा है जब महीने पहले ही ‘सुपर 30’ की फीमेल लीड को अंतिम रूप दे दिया गया था.”

क्या पी.आर एजेंसियों के काम को किसी परिभाषा में बांधा जा सकता है?

बी-टाउन के जाने माने पीआर पब्लिसिस्ट डेल भगवागर बताते हैं “पीआर, अपनी उत्कृष्टता से एक मीडिया मैनिपुलेटर है. जितना बेहतर मैनिपुलेटर उतना ही बेहतर पीआर. हम उस दौर में जी रहे हैं जब धारणा ही वास्तविकता है. पीआर एजेंसियां इस तरह की धारणा को बनाती हैं.”

आपको यहां बता दें कि ‘मैनिपुलेटर’ का आम भाषा में सरल अर्थ होता है ‘बेवकूफ बनाने वाला’. पीआर एजेंसियों के पास कोई ऐसा नैतिक तरीका नहीं है, जिससे वे लोगो के मन में अपने क्लाइंट्स की अच्छी धारणा को बना सकें! इसकी मुख्य वजह है कि उनके जो क्लाइंट्स हैं वे खुद अनैतिक हैं इसलिए उनको पीआर एजेंसियों की जरूरत होती है.

पिछले साल तक अभिनेता रणबीर कपूर का और मीडिया का रिश्ता खटास में था. आये दिन रणबीर कपूर का किसी ना किसी मीडियाकर्मी से झगड़ा हो जा रहा था. इस वजह से आम आदमी के दिमाग में इस तरह की धारणा बन रही थी कि ‘रणबीर कपूर अच्छा इंसान नहीं है.’ और इसका सीधा असर उनकी फिल्मो के बॉक्स-ऑफिस कलेक्शन पर भी दिख रहा था. इसलिए भले ही असल ज़िन्दगी में वे अच्छे इंसान ना हो लेकिन उन्होंने लोगो की धारणा में अच्छा इंसान बनने के लिए पीआर एजेंसी की खोज शुरू कर दी थी.


Ranbir Kapoor Looking for PR Agency
स्क्रीन शॉट : bollywoodlife.com से 

और इसका आप असर भी देखिय. संजय दत्त की बायोपिक में ऐसा कुछ नहीं था जो नया बताया गया हो लेकिन इसके बावजूद फिल्म ने सारे कमाई के रिकार्ड तोड दिये. पहले दिन ही फिल्म ने लगभग 35 करोड़ रुपए कमाए थे.

तो साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाओ और अपने क्लाइंट्स को फायदा पहुंचाओ. यही है मोटा-मोटी पीआर एजेंसियों की परिभाषा!

पीआर एजेंसियों के कुछ प्रचलित हथकंडे

सेलेब्स को मौजूदा कम्पटीशन में बनाये रखने के लिए पीआर एजेंसियां तरह तरह के हथकंडे अपनाती हैं. इसमें कईं बार कुछ सफल होते हैं, कईं बार कुछ फ़ैल भी! लेकिन कुछ हथकंडे सदियों से चलते आ रहें हैं और कुछ अब समय की मांग बन चुके हैं. हथकंडो की एक फेहरिस्त यहाँ मौजूद है:

#1 

लव अफेयर्स

आपके दिमाग में कभी न कभी तो यह सवाल आया ही होगा कि “कैसे किसी भी फिल्म की रिलीज से ठीक पहले उसके हीरो-हिरोइन के बीच अचानक प्यार का गुब्बारा  फूलने लगता है? और कैसे फिल्म की इतिश्री के तुरंत बाद ये गुब्बारा फुट भी जाता है?”

अपने करियर के सबसे कठिन दौर से गुज़र रहे कपिल शर्मा की ‘फिरंगी’ को याद करें तो इस फिल्म की रिलीज़ से ठीक पहले ही खबर आई थी कि कपिल और उनकी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड गिन्नी चतरथ का ब्रेकअप हो गया है. अब जरा सोचिये, ये कपल एक दूसरे को कॉलेज के टाइम से जानते थे लेकिन ब्रेकअप का महूरत फिल्म की रिलीज़ के पहले ही आया. कमाल है ना! वह एक पीआर स्टंट ही था क्योंकि डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, जून महीने में कपिल शर्मा अपनी उसी ब्रेकअप वाली गर्लफ्रेंड गिन्नी चतरथ के साथ ग्रीस में थे.

‘बागी 2’ से पहले टाइगर श्रॉफ और दिशा पटानी के बीच रोमांस की खबरें, ‘तेवर’ की रिलीज के दौरान सोनाक्षी सिन्हा और अर्जुन कपूर के बीच डेटिंग की खबर, ‘कमीने’ की शूटिंग के दौरान प्रियंका चोपड़ा और शाहिद कपूर का नजदीक आना, जॉन अब्राहम और बिपाशा बसु के रिश्ते की अटकलबाजी, ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं. इन सब के पीछे पीआर एजेंसियों का दिमाग होता है.

वैसे, आजकल बॉलीवुड की एक्ट्रेसेज का बॉलीवुड एक्टर्स के साथ लव अफेयर यह एक छोटा हथकंडा भी माना जाने लगा है क्योंकि किसी क्रिकेट्स के साथ या हॉलीवुड सेलेब्स के साथ नाम जुड़ना ज्यादा इफेक्टिव है. मानो सफलता की गारंटी है.

पिछले साल, एक्‍ट्रेस ऋचा चड्ढा ने एक इंटरव्‍यू में कहा था कि “जब मैं इंडस्ट्री में आई तो एक पीआर के आदमी ने मुझसे कहा कि फलां ऐक्टर को मेसेज भेजिए और इसके साथ डेट पर जाइए. जब मैंने कहा कि वह तो शादी-शुदा है तो उस आदमी ने एक क्रिकेटर को मेसेज भेजने की बात कही. उसने आगे कहा कि इससे मेरे करियर और पब्लिक इमेज को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी.”

#2 

ब्रेकअप्स 

शाहिद कपूर और करीना कपूर की ‘जब वी मेट’ तो याद ही होगी! इस फिल्म की सफलता की एक वजह दोनों का ब्रेकअप भी था. आपको याद होगा कैसे इस फिल्म के रिलीज़ होने के बीच तक जयपुर की गलियों में दोनों का प्यार परवान चढ़ा था. और फिर एकाएक रिलीज के पहले फिल्म के निर्माताओं ने मीडिया को बुलाया और बड़ी चालाकी से करीना और शाहिद के ब्रेकअप की खबर लीक कर दी. उसके बाद पूरा मीडिया बस इसलिए काम करने लगा कि “कब, कहाँ और कैसे शाहिद और करीना का आमना-सामना होगा और कैसे दोनों असहज हो गए?” फोटो पे फोटो. एक से बढ़ कर एक.

लेकिन बरखुरदार पीआर एजेंसी के इस सर्कस ने फिल्म को न सिर्फ हिट करवाया बल्कि अच्छा खासा पैसा भी कमा के दिया. अभिनेता, अभिनेत्री, निर्माता, डायरेक्टर सबकी गाड़ी पटरी पर आ गई.

#3  

विवादित बयानबाजी

आजकल ये स्टंट सबसे पॉपुलर है. पीआर एजेंसियां हर कलाकार को अपनी फिल्म की रिलीज से पहले विवादित बयानबाजी से चर्चा में ला देतीं हैं. कंगना रनौत की ‘सिमरन’ को याद कर लीजिये! फिल्म की रिलीज के ठीक पहले कंगना ने ऋतिक रोशन से अपने कथित अफेयर पर विवादित बयानबाजी शुरू कर दी थी. सलमान ने भी अपनी फिल्म ‘सुल्तान’ की रिलीज के पहले अपने वर्कआउट (कसरत) की तुलना रेप से की थी.

जब शाहरुख खान की ‘रब ने बना दी जोड़ी’ और आमिर खान की ‘गजनी’ एक साथ रिलीज़ हो रही थी तब दोनो छोर से विवादित बयानों ने ‘शीत युद्ध’ का रूप ले लिया था.

नेपोटिस्म के मुद्दे पर बयानबाजी भी इसी श्रेणी का हिस्सा थी. आज देखो सब ठंडा पड़ गया है. नेपोटिस्म पर विरोध करने वाले और समर्थन करने वाले दोनों साथ मिलकर राजनैतिक टर्र-टर्र कर रहे हैं. यानि समय के साथ हथकंडों को भी बदला जा रहा है. खूब कम्पटीशन है!

#4 

राजनैतिक टर्र-टर्र

बड़े परदे और अब छोटे परदे के कलाकारों का भले ही राजनैतिक बुद्धिजीविता से दूर-दूर का वास्ता ना हो लेकिन आजकल हर कोई सीधा मोदी को टैग कर रहा है. ये लोग खुद तो अपने कंफर्ट जोन से बहार आएंगे नहीं लेकिन नेताओं को क्या करना है इसकी हिदायत रोज दे रहे हैं.

और तो और ये सेलिब्रिटीज अपने घर की कॉन्ट्रोवर्सीज को नहीं सुलझा पा रहे लेकिन राजनैतिक कॉन्ट्रोवर्सी में छलांग लगाना इनका मूलभूत अधिकार बन चुका है.

अपने करियर में कुछ भी सुधार नहीं कर सकने वाली श्रुत्ति सेठ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेल्फी विद डॉटर मुहिम पर सवाल कर रही थीं और कह रही थी “सेल्फी कोई ऐसी डिवाइस नहीं है जिससे बदलाव आएगा मिस्टर पीएम. सुधार की कोशिश करे.” छोटे परदे की कलाकारा दिव्यांका त्रिपाठी मोदी को टैग कर के स्वछता अभियान को कटघरे में खड़ा करतीं हैं. आपको फिर से बता दूँ कि ये सब उनके मन की उपज नहीं है. नाही उनके निजी विचार हैं. जिन मुद्दों पर ये लोग बकर-बकर कर रहें हैं, आमजीवन में उसपर ढंग से 30 मिनट बोल भी नहीं पाएंगे!

तो मित्रों, अब पता चला ना! इन सेलेब्स के बारे में आप जो कुछ पढ़ रहें हैं, सुन रहे हैं, देख रहें हैं, सारा खेल पीआर एजेंसियों का है.

पीआर एजेंसियाँ चाहे तो ‘राज कपूर’ को द्रोणाचार्य मानकर पूजा कर सकती हैं!

वर्तमान को पीआर एजेंसियों की जरुरत और उनके कारनामों के उबाल का दौर कहा जा सकता है. लेकिन राज कपूर एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने तत्कालीन समय में भी पब्लिसिटी पाने के लिए अच्छे खासे पैंतरे आजमाएं थे.

कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के मुताबिक, ‘फिल्मों की पब्लिसिटी के मामले में राज कपूर का कोई सानी नहीं था.”

वैजयंती माला की आत्मकथा ‘बॉन्डिंग…ए मेमोयर’

अभिनेत्री वैजयंती माला ने भी अपनी आत्मकथा ‘बॉन्डिंग…ए मेमोयर’ में राज कपूर के पीआर हथकंडो के बारे में बताते हुए लिखा है कि “उन्होंने फिल्म ‘संगम’ की पब्लिसिटी के लिए जानबूझकर उनसे अपने रिश्ते की बात उछाली थी.” एक समाचार एजेंसी को इंटरव्यू के दौरान वैजयंती माला ने कहा था कि, “राज कपूर पब्लिसिटी के बहुत भूखे थे, वो हमेशा सुर्खियो में बने रहना चाहते थे, इसी वजह से मैं भी इस अफवाह का शिकार बनी कि, मेरा राज कपूर से रोमांस चल रहा है.”

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