पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में अभी चुनाव सम्पन्न हुए, परिणाम परम्परागत बिल्कुल नहीं रहे। एक बड़ा बदलाव, त्रिपुरा में भाजपा की जीत के रूप में दिखा। कांग्रेस का प्रदर्शन राहुल गांधी की अपेक्षाओं का अनुरूप ही रहा शायद! और लेफ्ट, इनको तो मानो जैसे काटो तो खून नहीं। बेचारे सदमे में हैं, कब तक उभरेंगे कहा नहीं जा सकता। शायद केरल में परम्परागत ‘गरीबी की घुट्टी’ वाली राजनीति से बाहर आकर ये समझें कि देश को विकास चाहिए, तो हालात सुधरें!

खैर बात होती है विजेता की! विजेता रही भाजपा ने इन चुनावों में एड़ी चोटी का जोर लगाया….सभी बड़े योद्धा पूर्वोत्तर की धरती पर उतार दिए। खुद प्रधानमंत्री मोदी समेत अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे बड़े नाम मशक्कत करते नजर आए, हो भी क्यों न….संघ की शून्य से शिखर की यात्रा को सफल जो बनाना था।

थोड़ी बात तो हारने वाले दल की भी….पिछले ढाई दशक से सत्ता में काबिज कम्युनिस्ट ‘माणिक सरकार की गरीबी’ और ‘ईसाई मिशनरियों’ को तुरुप का इक्का समझ रहे थे, बात तो यहाँ तक उठी कि चर्च से फतवा जारी हुआ और ‘क्रॉस’ और ‘त्रिशूल’ के बीच का युद्ध घोषित कर दिया गया….अब बताने की जरूरत नहीं कि जनता ने किसे चुना!

खैर भाजपा का हर चुनाव की तरह विकास का मुद्दा इस बार भी हल्का पड़ता नजर आया, सभी बड़े योद्धा धराशायी होते दिखे। फिर भाजपा के चुनावी चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने मैदान की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथ में सौंपी….और ये क्या, सारी बाजी ही पलट गई। ये कोई चमत्कार नहीं था दरअसल त्रिपुरा में ‘नाथ’ वर्ग की आबादी है 12 से 13 लाख और त्रिपुरा की कुल आबादी है 36 लाख। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वोत्तर में  कमलापुर, खायेरपुर,  मतरबारी, सबरूम, पब्लाछाडा, जुबराजनगर और कंचनपुर समेत कई जगहों पर रैलियां और रोड शो किये. नाथ वर्ग का प्रमुख तीर्थ गोरखनाथ पीठ, जिसके महंत हैं योगी आदित्यनाथ जी….अब यह तो सम्भव नहीं कि गुरुजी की आज्ञा का पालन चेला न करे!

पिछले विधानसभा चुनावों में 50 में से 49 सीटों पर जमानत जब्त कराने वाली भाजपा के लिए तो यह जीत चमत्कार से कम नहीं। इस जीत से योगी आदित्यनाथ का कद पार्टी के भीतर और बाहर बहुत मजबूत हुआ, उनकी हिदुत्व आइकॉन वाली छवि और चमकी।

अब माहौल शांत है भाजपा ने राज्य में सरकार बना ली है, तब देखना यह होगा कि जो विकास का झंडा लिए पार्टी दौड़ रही है, उसे कहाँ तक लेकर जाती है। क्योंकि पूर्वोत्तर में हालात बाकी देश से बिल्कुल भिन्न हैं। एक ओर जहाँ नक्सली हर घर में घुसे हैं, तो वहीं ईसाई मिशनरियों का जाल भी बच्चे-बच्चे के दिमाग को कब्जे में लिए हुए है और पड़ोसी देशों की समस्याएं भी दशकों से जस की तस हैं….प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे से इस क्षेत्र के लोगों को बहुत उम्मीदें हैं!

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