त्रिपुरा चुनाव के परिणाम वामदलों के लिए किसी मातम से कम नहीं हैं. यहाँ से उनके लिए अत्यंत कमोबेश वाली स्थिति उत्त्पन्न होने वाली है. ना वे अपनी विचारधारा का त्याग कर सकेंगे, नाही विकास के मार्ग को अपना सकेंगे. त्रिपुरा चुनाव ने साबित कर दिया है कि भारत का कोई भी राज्य इस नवीन युग में कथित वामपंथ की विचारधारा के साथ आगे नहीं बढ़ सकता.

वामपंथियों ने गरीबों के हक़ के लिए लड़ने का छलावा करते-करते, कब गरीबी को ही चुनावी रोटियां सेंकने की भट्ठी बना डाली, यह अपने आप में खोज का विषय है. त्रिपुरा चुनाव के पहले जब नरेंद्र मोदी हाइवे, आईवे, रेलवे और अर्थ एयरवे की बात कर रहे थे तब वामपंथियों की सुई वहीं अटकी हुई थी कि हमारे मुख्यमंत्री देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री है.

शनिवार सुबह, जब भाजपा त्रिपुरा में बहुमत के आंकड़े के करीब पहुँच रही थी तब टीवी डिबेट्स में भी वामपंथी नेता इसी बात पर जोर लगा रहे थे कि “क्या इस देश में माणिक सरकार के अलावा कोई इतना गरीब मुख्यमंत्री है जिसके बैंक खाते में मात्र 9000 रुपये हों?” न्यूज़ एंकर माणिक सरकार के विकास के कार्यो पर प्रश्न कर रहे थे और वामपंथी नेता माणिक सरकार की गरीबी को आगे कर जवाब देने से कतरा रहे थे.

एक मुख्यमंत्री की गरीबी को इस तरह से हथियार बनाकर यह उम्मीद करना कि देश की जनता भी उनके साथ गरीबी अपना लेगी तो इसका अंजाम वे त्रिपुरा के परिणामों में देख ही सकते हैं. माणिक सरकार के पास भले ही आज घर न हो, स्मार्टफोन न हो, कार न हो लेकिन देश की जनता तो चाहती है कि उनके पास कम से कम ये सब तो हो ही और उसमें गलत भी क्या है? आम आदमी यदि अमीर बनने के सपने ही ना देखे और माणिक सरकार को अपना रोल मॉडल बना लें तो शायद इस आधुनिक युग में ज़िन्दा रहना मुश्किल हो जाएगा!

हालांकि, माणिक सरकार की पत्नी पांचाली भट्टाचार्य के पास करीब 24 लाख रुपये की कैश फिक्स्ड डिपॉजिट है और पार्टी की ओर से भी हर महीने उनको अलाउंस मिलता रहता है.

बहरहाल, एक व्यक्ति के गरीब रहने में और साधारण रहने में बहुत फर्क है साहब! रुपया, यह इस दौर में खुद जिन्दा रहने और परिवार के पालन-पोषण के लिए सबसे बड़ी और बुनियादी जरूरत है. यदि मैं वामपंथियों के रास्ते पर चलते हुए गरीबी अपना लूंगा तो शायद मेरे और मेरे परिवार के लिए भीख मांगने की नौबत आ सकती है. और तो और हमारे पास तो बैकअप में ऐसी पार्टी भी नहीं जो हर महीने अलाउंस क्रेडिट करती रहे.


तो मित्रों, अमीर बनने के सपने देखो,
जम के पैसा कमाओ, हो सके उतना सादा जीवन उच्च-विचार अपनाओ.
और गरीबी का महिमामंडन करने वाले कोरे वामपंथ के रोल मॉडल ना बनाओ !

बिलकुल, त्रिपुरा के युवाओं की तरह !

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