इस 26 जनवरी की आपकी क्या तैयारी है, खास पिलान आपके लिए !


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भारत एक गणतंत्र है, इसे जनतंत्र भी कहते हैं। इसी दिन से हमारा संविधान लागू हुआ, जिसने हमें एक मजबूत गणतंत्र के रूप में दुनिया में सम्मान दिलाया। हमने ऐसे राष्ट्र का निर्माण किया, जिसमें समाज के अंतिम पायदान पर जीवन यापन करने वाले व्यक्ति को भी अपनी बात उतनी ही सहजता से कहने की आजादी है, जितनी भारत के प्रधानमंत्री को या राष्ट्रपति को है। परन्तु याद रखें, स्वतंत्रता और शक्ति अपने साथ कई जिम्मेदारियाँ भी लाती हैं।

हर साल इंडिया गेट और राजपथ पर बड़े ही धूमधाम से गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। यह समारोह इतना शानदार होता है कि लोग टीवी पर भी इसे पूरा देखते हैं। इस दिन दिखाई जाने वाली भारतीय सेना के शक्ति प्रदर्शन और सुंदर झांकियां भारत पर गर्व महसूस कराती है। सिर्फ हम भारतीय ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे मशहूर सर्च इंजन गूगल भी भारत के गणतंत्र दिवस के सम्मान में अपना डूडल भारतीय तिरंगे के तीन रंगों से रंग देता है।

हम भारतीय तो पूरे साल उत्सव मनाते हैं और फिर, यह तो राष्ट्रीय उत्सव है। बसंत ऋतु है, प्रकृति भी खुशी से झूमती है, फिर हम तो देशभक्ति में शराबोर 130 करोड़ भारतीय! इसबार का गणतंत्र दिवस कई मायनों में बहुत खास है, और हम चाहते हैं कि इस जनतंत्र दिवस पर आपसे तनिक मन की बात होए जाए…… कुछ खास आप लोगों की मन की बातें इकठ्ठा की हैं हमनें!

इन सभी ‘मन की बातों’ को मिलाकर हम हमारी ‘मन की बात’ आपके मन से कहते चलेंगे.  हमारी ‘मन की बात विशुद्ध है’ इसमें लागलपेट नहीं है जो  ‘भारत तेरे टुकड़े’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाये… सो मिले सुर मेरा तुम्हारा ! 

1. अलसाई सुबह में आप लोग टीवी पर गणतंत्र दिवस की परेड देखने का मन बनाये होंगे….देश भक्ति माइल्ड फीवर से आप पीड़ित दिखेंगे. 

इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह कुछ खास ही होगा। इतिहास में पहली बार भारत की शक्ति और संस्कृति देखने के लिए राजपथ के मंच पर न सिर्फ दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्ष होंगे। बल्कि आसियान और भारत की एकजुटता भी सामने दिखेगी। परेड में इंडो आसियान की एक या दो संयुक्त झांकी भी होगी। शायद यह भी दिखाने की कोशिश हो कि सभी इकट्ठे होकर कैसे बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

एक साथ दस राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी को पहले ही बड़ी कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। खासकर चीन के संदर्भ में यह बेहद अहम माना जा रहा है। परंपरा यह रही है कि जिस देश के मुख्य अतिथि होते हैं उस देश की सेना का भी परेड राजपथ पर शामिल होता है। लेकिन सूत्रों की मानें तो इस बार कुछ और बदलाव हो रहा है। आसियान देशों के कलाकार भी अपनी संस्कृति दर्शाएंगे और दो झांकी इंडो आसियान संबंध पर हो सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि विदेश मंत्रालय की ओर से ऐसी दो झांकी प्रस्तुत की जाएगी। दस देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम शामिल हैं।

2. कुछ सोच रहे होंगे कि छुट्टी का लुफ्त उठाया जाए, पद्मावत देखकर….

संजय लीला भंसाली द्वारा निर्मित यह फ़िल्म काफी विख्यात और कुख्यात रही…..पइसा लगाया है भैया, भंसाली ने। बताया गया कि फ़िल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ हुई, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया! अभी सुदर्शन न्यूज के संचालनकर्ता सुरेश चव्हाण ने फ़िल्म देखी और फ़िल्म के निर्माता और विरोधियों के बीच झगड़ा समाप्त करने के लिए, पुल का काम किया, परन्तु किस्सा वही कि ढाक के तीन पात….. बाद में मालूम हुआ कि ये तो वही बात हो गयी, जैसे – 2014 में जिस 2G घोटाले की वजह से बीजेपी सत्ता में आई, वह 2G बम तो फुस्स निकल गया, साबित हुआ कि 2G घोटाले जैसी कोई चीज ही नहीं…..भई, अगर होती तो दोषी भी होते और दोषियों को सजा भी होती….खैर, जो लोग सिनेमाघरों में फिल्में देखने का शौक़ रखते हैं, वे 26 जनवरी को पद्मावत देखने जा सकते हैं…..हेलमेट, नी-कैप और मोटी सी जैकेट पहनकर!

3. कुछ ने वीकेंड्स का प्लान बना लिया होगा, दोस्तों के साथ हैंगआउट्स…..

दोस्तों के साथ हैंगआउट्स तो बहाना है, रामगोपाल वर्मा की गॉड सेक्स एंड ट्रुथ भी तो आ रही है…..काफी लोग पिछले कई दिनों से बहुत जोर से इंतजार कर रहे होंगे इसके आने का! भई क्यों नहीं, फिल्में तो बनाई ही देखने के लिए जाती हैं….फिर इस फ़िल्म की तो बात ही अलग है, रामू एक अलग ही लेवल के डाइरेक्टर हैं, रामगोपाल वर्मा की आग और गन्स एंड थाइज तो आपने देखी ही होंगी! खुलेपन को खुलेआम एकदम से खोलकर रख दिया, कमाल की काबिलियत है..ऐसा आप सोच रहे होंगे. क्यूँ कि रामगोपाल वर्मा का चार्ट दिखा रहा है, उनकी अदाकारा मोदी जी से ज्यादा पोपुलर है और ये देश तो पिछड़ों का देश है, नंगई तो खुलेआम बिकती है और रामू अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ है.

4. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में उमड़ेगा कथित ब्रह्मज्ञान….

यूँ तो जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल विश्व विख्यात है और साहित्य जगत में अनूठी पहचान रखता है….परन्तु समस्या यहाँ भी वही पुरानी वाली, तथाकथित ज्ञानियों से परेशान भारत की जनता! इनके साथ समस्या यह है कि जो इन्हें पता है उसी को ब्रह्मज्ञान मान बैठे हैं ये…..नहीं यार मुझे ब्रह्मज्ञान नहीं कहना चाहिए, साम्प्रदायिक हो जाएगा…..आसमानी ज्ञान ठीक रहेगा शायद! इससे क्या है न, मैं खुद को सेक्युलर साबित कर पाऊँगा और शायद हो सकता है कि मेरे लेखों को भी गोयनका अवार्ड मिल जाये!

5. संविधान बचाओ अभियान….

इस गणतंत्र दिवस पर अभिव्यक्ति की आजादी भी अपने चरम पर होगी! जी हाँ, पुणे के भीमा कोरेगांव से हिंसा एवं आगजनी की शुरुआत करने वाले आज भी इकट्ठे हो रहे हैं। और सबसे मजेदार बात यह कि संविधान को ये लोग, संविधान की तिलांजलि करके बचाएंगे…..भगवान जाने क्या करना चाहते हैं! एक ओर अंबेडकर को अपना भगवान कहते हैं, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर पथराव और आगजनी करते हैं, क्या ये कृत्य अंबेडकर के बनाये हुए संविधान के संगत हैं! खैर मानसिक स्तर भी कोई चीज होती है…..कुछ लोग दिमाग से सोचते हैं तो कुछ घुटने से!

6. अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, बिग बाजार जैसे प्लेटफार्म भी…. रिपब्लिक डे की सेल गरमागरम है

भारतीय जनता खरीददारी करने की बड़ी शौकीन है। दीवाली, होली, रक्षाबंधन कोई भी त्यौहार हो, बिन खरीददारी सब सून! ऐसे मौकों को भुनाना इन व्यापारियों को खूब आता है…..चाहे बात डिस्काउंट की हो, एक पर एक फ्री या फिर कैशबैक की….हाँ, जबकि बात गणतंत्र दिवस की है तो हो सकता है कि सबकुछ तिरंगे के रंग में रंगा हो…..जैसे तिरंगा गोला, समोसे के साथ तिरंगी चटनी और हो सकता है कि रसगुल्ला भी तीन रंगों में डूबा हुआ मिले…. हद तो तब हो जाती है जब ये कम्पनियाँ ज्यादा ही राष्ट्रप्रेम दिखाने के चक्कर में चप्पल और डोरमैट को भी तिरंगे से रंग देती हैं… 🙁

7. कुछ बच्चे 1 रुपये वाला तिरंगा बेच रहे होंगे…..

एक बच्चा आएगा आपके पास, जिद करेगा आपसे तिरंगा खरीदने की, आप आगे बढ़ जाएंगे क्योंकि आप उससे इत्तेफाक नहीं रखते। या फिर आप वह तिरंगा खरीद लेंगे और उस तिरंगे का 26 जनवरी के बाद क्या हुआ, इतिहास में कोई जिक्र नहीं मिलेगा! खैर राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ति हृदय में होनी चाहिए सो…..यह अच्छा है कि लोग तिरंगा बेचकर रोजी-रोटी की जुगाड़ करते हैं, वरना इस देश के कुछ लोग तो देश भी बेच ही रहे हैं…..

आने वाले समय में हमारे गणतंत्र यानि रिपब्लिक पर अधिकार सिर्फ और सिर्फ अर्नब गोस्वामी पर होगा क्यूंकि देश की आवाज़ उनका कॉपी राईट है. 

आसमान से सारा भारत सिर्फ तिरंगे के रंग में दिखेगा…..माफ कीजियेगा आसमानी और हरा बहुतायत में होगा क्योंकि वो oppo और vivo के होर्डिंग्स और बैनर्स हैं!

इतना सब होगा इस 26 जनवरी पर, आप अपनी राय या ऐसी ही चुटीली बातें हमें कमेंट्स के जरिये बता सकतें हैं…..सबसे मजेदार कमेंट्स करने वालों के लिए कुछ खास है! हमारी तरफ से ! 


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