राम लला हम आयेंगें, सियासत की मार खाते जायेंगे

आप सोच रहे होंगे कि नारा कुछ और था. यहाँ गलत लिखा गया है, लेकिन मंदिर मुद्दे सियासी पर दांव-पेंचों को देखकर तो बेहतर नारा यही है. या यूँ कहें तो भी गलत नहीं होगा कि ‘मंदिर वहीं बनायेंगे लेकिन तारीख नहीं बताएँगे’ खैर अभी तक तो मंदिर बनाने की सरकार की क्या नियत है, यह कुछ भी स्पष्ट नहीं है. क्यूँकि चुनाव लड़ने से पहले मंदिर बनाने का वादा होता है और चुनाव जीतने के बाद वो माननीय न्यायालय का मामला हो जाता है. खैर मंदिर तो तथाकथित राम भक्त सरकारें न्यायालय के पाले में डाल देती हैं. लेकिन हम बात करें राम लला और राम भक्तों को टारगेट करते हुए हुई सियासत और साजिशाना घटनाओं की, तो इस तरह की घटनाओं की एक लम्बी फेहरिस्त है जिस पर अच्छी खासी रिपोर्ट बन सकती है.

#1.


खबर दो-चार दिन पहले की ही है. राम जन्मभूमि परिसर से कुछ संदिग्धों को पकड़ा गया है. 8 लोगों को रात के दो बजे टेंट नुमा राम मंदिर में घुसने की कोशिश करते हुए पुलिस ने पकड़ा है. इनसे पूछताछ में पता चला है कि ये सभी राजस्थान के जालौर जिले से थे और इनके नाम मोहम्मद शकील, मोहम्मद शाकिर, मोहम्मद सईद, मोहम्मद रजा, मोहम्मद इरफान, मोहम्मद मदनी, मोहम्मद हुसैन और अब्दुल वाहिद बताये गये. वैसे इनके पास किसी तरह के हथियार या कोई सामग्री नहीं मिली, लेकिन ये सवाल तो उठता ही है कि ये आखिर वहां गए क्यों?  शकील, शाकिर, सइद रामधुनी करने तो वहां गये नहीं होंगे और मान भी लें कि सेक्युलर होने के नाते चले भी जाएँ, लेकिन रात के 2 बजे तो राम का कोई पक्का भगत भी नहीं जाता. फिर ये भगत शकील,रजा मियां इतनी रात किस मकसद को पूरा करने गये थे? क्या इसके पीछे किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश थी?

#2.

Photo : Indian Express

राजनीति  से प्रेरित इसी तरह की एक घटना को 2 नवम्बर 1990 की तारीख को अंजाम दिया गया. जब निहत्थे कारसेवकों पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर गोलियां चलायी गयी, जिसमें 16 कारसेवकों की मौत हुयी. हालाँकि कहा जाता रहा है कि उस फायरिंग में मारे गये बेगुनाहों की असल संख्या को छुपाया गया था. इस घटना पर मुलायम सिंह पिछले साल अफ़सोस भी जता चुके हैं. जिसका मतलब साफ़ है कि फायरिंग का आदेश गलत था जो पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित था. उन्होंने ये गुनाह कुबूला है.

#3.

Photo : The Hindu

बाबरी की आग से पाकिस्तान में भी हिन्दू झुलसे हैं. जब 1992 के दौर में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहाया गया, तब पाकिस्तान में मुस्लिम उपद्रवियों ने जवाब में पाकिस्तान भर में दर्जनों मंदिरों और हिंदू स्थलों को ध्वस्त कर दिया. इन घटनाओं के दौरान 6 हिन्दुओं की बेरहमी से हत्या भी हुयी. तब से ही पाकिस्तान में  हिंदू मंदिरों पर हमले और हिन्दू नागरिकों की हत्या की घटनायें होती रही हैं.

#4.


2002 में भी एक घटना की साजिश रची गयी और जिसे गोधरा में अंजाम दिया गया था. 3 मार्च 2002 को साबरमति एक्सप्रेस सेअयोध्या लौट रहे कारसेवकों की बोगी नम्बर S-6  को दंगाइयों ने आग के हवाले कर दिया था. जिसमें  56 कारसेवकों की मौके पर ही मौत हो गयी थी. जिसके बाद गुजरात में भडके साम्प्रदायिक दंगों की आंच पर मीडिया चैनल्स और तथाकथित बुद्दिजीवी आज भी अपनी रोटियां रहें हैं. लेकिन गोधरा में हुए भीषण हत्याकांड को सेकुलरिज्म की आढ़ में विदेशों से पोषित मीडिया और बुद्दिजीवियों द्वारा दफ़न कर दिया गया. और तो और UPA की केंद्र सरकार द्वारा जाँच एजेंसियों का दुरूपयोग करके गोधरा की प्रायोजित घटना को दुर्घटना साबित करने की भरपूर कोशिश की गयी.

#5.

अयोध्या में कुछ दिन पहले संदिग्धों के पकड़े जाने जैसे ही घटना सन 2005 में भी हुई थी. उस समय राम मंदिर में लश्कर के 5 आतंकी घुसे थे. वो भी इसी रास्ते से, उनका टारगेट राम लला का टेंट उखड़ना था. उनका मंसूबा ग्रेनेड और रोकेट लांचर से अयोध्या को दहलाने का था. हालाँकि वो अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाये और सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गये जिससे पांचों आतंकी मारे गये. आतंकियों के हमले से 2 सिविलीयन्स की मौत हो गयी थी. इस हमले के बाद पूरा अयोध्या सहम गया था.

Lal Krishna Adwani Arrested during Rath Yatra

राम मंदिर विवाद 1853 से है और अब तक पता नहीं कितनी बार साम्प्रदायिक उन्माद फ़ैलाने और आन्दोलन से जुड़े लोगों को सताने की कोशिशें होती रही हैं. अयोध्या में सबसे बड़ी घटना 1992 में बाबरी विध्वंस की है. तब से मन्दिर विरोधियों द्वारा राम जन्मभूमि आन्दोलन से जुड़े लोगों व राम भक्तों को टारगेट किया जाता रहा है. और इन्ही द्वेषपूर्ण कोशिशों के चलते जन्मभूमि पर हमला, रामभक्तों पर गोलीबारी, कारसेवकों पर आतंकी हमले जैसी कई अमानवीय घटनाएँ हुई. अब सवाल कथित राम भक्त सरकारों के लिए है  कि वे मंदिर निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट करें. विरोधियों की इन द्वेषपूर्ण साजिशों पर रोक लगायें. पहले जिन्होंने इस तरह के षडयंत्रो को अंजाम दिया है, उन पर कार्यवाही को दें.