फ़ूड चैन चलाने वाली मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए इंडिया केवल एक बाजार है. ग्राहकों के प्रति जिम्मेदारी और सेहत की चिंता तो ये कंपनियां बस अमेरिका और दूसरे बड़े देशों में ही करती हैं.  भारत में करती है तो बस खिलवाड़ सेहत के साथ विश्वास के साथ. हम बात कर रहे है,बड़ी विदेशी कंपनियों के फ़ूड चैन की जिसमें चिकन से सम्बंधित फ़ूड प्रोडक्ट्स से खतरनाक इन्फेक्शन के खतरे की बात सामने आई है. मैकडोनाल्ड्स ने भारत में इस समस्या को नजरंदाज करते हुए, अन्य दूसरे देशों में एक समयावधि तक के लिए चिकन प्रोडक्ट्स पर रोक लगाई है और जानवरों में गैरजरूरी एंटीबॉयोटिक की समस्या का समाधान होने तक ये बैन जारी रखने का फैसला लिया है.            

हाल ही में सैंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमैंट (सी.एस.ई.) की रिपोर्ट के हवाले से भारत की कईं मल्टीनेशनल फ़ास्ट फ़ूड कंपनियों के चिकन व अन्य मीट सम्बंधित उत्पादों में जबरदस्त एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल की खबर सामने आई हैं. जिसने ग्राहकों की सेहत को दांव पर लगा दिया हैं. खासकर बच्चो की रोग प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे खत्म कर रहा हैं. कुछ देशों में बड़े मुर्गी पलकों ने भी संक्रमित मुर्गियों से पैदा होने वाले खतरे से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है. जबकि भारत में तो आधे से ज्यादा पॉल्ट्री फार्म्स ही अवैध रूप से चल रहे है. फिर इस तरह का कदम उठाना तो दूर की बात है और जो वैध हैं, वे बड़े फ़ूड चेन्स के हैं. उन पर सरकारी डंडा चलने से पहले वे कोई कदम उठाते नहीं.और रही बात सरकारी संस्थानों की तो उनका डंडा ठंडा है जो चलता नहीं.

आज बिक्री हो रहे चिकन्स में इंसानों के लिए जरुरी एंटीबॉयोटिक की मात्र बहुत अधिक तादाद में निकल कर आ रही रही है. इन मुर्गियों के सेवन से इंसानों में सुपरबग के फैलने का खतरा रहता है. सीएसई ने इस रिपोर्ट के आने के बाद भारत में चिकन प्रॉडक्ट्स सर्व करने वाली 11 मल्टीनेशनल और भारतीय कंपनियों से इस बारे में जवाब माँगा है. जिनमे से केवल छ: कम्पनियां डोमिनोज़ पिज्जा, सब-वे, डंकिन डोनट्स और बर्गर किंग – और दो भारतीय ब्रांड – बरिस्ता और कैफे कॉफी डे से ही वापस जवाब मिला है. जबकि मैकडोनाल्ड्स, KFC ने कोई जवाब नहीं दिया है और ना ही इसे लेकर कोई कदम उठाया है.

पिछले सप्ताह, इसी मसले पर बात करते हुए सी.एस.ई. के उप-निदेशक चंद्रभूषण ने कहा कि “भारत में ये मल्टीनेशनल फ़ास्ट फ़ूड कंपनियां एंटीबायोटिक को लेकर किसी तरह का मानक नहीं अपनातीं हैं. जिसकी वजह से यहां जो लोग इन मल्टीनेशनल फ़ास्ट फ़ूड कम्पनियों के उत्पाद खा रहे हैं उनमें एंटी माइक्रोबियल रजिस्टैंस (ए.एम.आर.) बढ़ रहा है. जो इंसानों में सुपरबग को फैला सकता हैं.”

बीबीसी की एक खबर के अनुसार मैकडॉनल्ड्स अमेरिकी बाजार में एंटीबॉयोटिक रहित फ़ूड देने की तैयारी कर रहा है. वर्ल्ड हेल्थ ओर्गनाइजेशन ने खतरनाक वायरस की एक लिस्ट जारी की है और इस लिस्ट में सबसे उपर है. ई-कोली जैसा ग्राम नेगिटिव बग(सुपरबग)  ये वायरस कमजोर मरीजों में संक्रमण फैलता है जिससे  ब्लड़ में इन्फेक्शन व निमोनिया का खतरा होता रहता है. एक रिसर्च में पाया गया कि पॉल्ट्री फार्म्स में जानवरों को जल्दी विकसित करने के लिए उन्हें भोजन में दी जाने वाले हानिकारक रसायन और एंटीबॉयोटिक ड्रग्स दिए जाते हैं. इन जानवरों से सम्बंधित फ़ूड प्रोडक्ट्स के सेवन से इंसानों में संक्रमण के खतरे के चलते कई देशों में चिकन, बीफ, और पोर्क पर शर्तों के साथ आंशिक पाबंदी लगाई है और मैकडॉनल्ड्स, बर्गर किंग, KFC को खास हिदायत दी गई है. आपको बता दें, चिकन प्रॉडक्ट्स वाले फ़ूड नेटवर्क मैकडोनाल्ड्स के चिकन में एंटीबॉयोटिक की जो मात्रा पाई गई है. उसका स्तर हमारी एंटी-बॉयोटिक लेने की रेग्युलर मात्रा से कहीं ज्यादा है. गौरतलब है कि एंटी बायोटिक्स डॉक्टर की सलाह से लिए जाते हैं.


एक ग्राहक हमारे परिसर पर सबसे महत्वपूर्ण आगंतुक है. वह हम पर निर्भर नहीं है. हम उस पर निर्भर हैं. वह हमारे काम की एक रुकावट नहीं है. वही काम का एक उद्देश्य है. ग्राहक हमारे व्यापार के लिए बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि व्यापार का हिस्सा है. हम उसकी सेवा के द्वारा एहसान नहीं कर रहे हैं. वह हमें सेवा करने का अवसर देकर हम पर एक एहसान करता है.

कैंसर और इन्फ्लुएंजा का खतरा

भारत में एक बड़ी समस्या चिकन और मीट के वेस्टेज का सही निस्तारण नहीं होना भी है. इस वेस्टेज की सड़न के कारण भी बीमारियाँ फैलती रहती है. खास तौर पर बकरीद पर बहुत अधिक मीट वेस्टेज के कारण हर साल उसके तुरंत बाद बुखार का वाइरस तेजी से फैलता है. इस तरह के चिकन फ़ूड के अधिक सेवन से इन्सान के शरीर में  एंटीबॉयोटिकस की मात्रा अधिक हो जाने से कैंसर का खतरा रहता है. इस कारण इन्फ्लुएंजा भी तेजी से फैला है जिससे शरीर में खून की कमीं तेजी से होती है, कमजोरी आ जाती है. भारत में पिछले कुछ सालों में इस बुखार से सैंकड़ों जानें गई हैं.

चीर निद्रा में हैं भारत सरकार और हेल्थ ऑर्गनाइजेशंस

2016 में, इसी तरह की रिपोर्ट बाहर आने पर, मैकडॉनल्ड्स, सब-वे, डोमिनोज़, बर्गर किंग जैसी मल्टीनेशनल फ़ास्ट फ़ूड कंपनियों ने मुर्गा मांस पर आधारित अपने खाद्य उत्पादों में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी लेकिन भारत के लिए अभी तक कोई रोडमैप तैयार नहीं किया गया हैं. अब आखिर सवाल ये है कि अमेरिका चिकन पर प्रतिबंध लगता है और वहीं भारत में धड़ल्ले से मैकडोनाल्ड्स, बर्गर किंग, KFC बेच रहे हैं संक्रमित चिकन. अमेरिका और अन्य देशों में फार्मी चिकन, बीफ, पिग्स पर भी पाबन्दी लगाई है. भारत के सम्बन्ध में सबसे रोचक बात तो ये है कि इंडिया में मुर्गी पालन केन्द्रों में एंटीबॉयोटिकस के इस्तेमाल पर रोक के लिए कोई कानून ही नहीं बना है. फूड सेफ्टी को लेकर इसी के चलते ये पूंजीपति कंपनियां अपनी मनमानी कर पाती हैं और लोगों के सेहत को खतरे में डालने का काम करती हैं.

अब आप को खुद ही अपनी सेहत के बारे में सावधान हो जाना चाहिये. सही खान-पान पर ध्यान दें और कबाब, चिकन बर्गर खाने के शौकीन हैं तो ज्यादा सावधानी बरतें और जगह का चुनाव सोच-समझ कर करें.


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