Dalai Lama

भारत की संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत दुनिया में किसी भी अन्य देश से ज्यादा समृद्ध है। हमने अध्यात्म और विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया को सर्वश्रेष्ठ दिया। हमने गणित के क्षेत्र में क्रांति जगाई, विज्ञान के क्षेत्र में आज भी हमारा कोई सानी नहीं, ध्यान जैसी चमत्कारी चीज दुनिया को हमने दी, शिक्षा व्यवस्था हमारी सर्वोत्तम थी। आज दुनिया भर के विश्विद्यालयों में हमारी संस्कृति और जीवन शैली को लेकर लाखों शोध चल रहे हैं….हमने दूसरे धर्मों की तरह धर्मांतरण कार्यक्रम नहीं चलाये, फिर भी दूसरी संस्कृतियाँ खिंची चली आती हैं। यह सब इसलिए कि हमारे सांस्कृतिक मूल्य सौम्य और समाज विज्ञान पर टिके हुए हैं।

आज का दौर कई मायनों में भारतीय संस्कृति के लिए बुरा है। हम अपने प्राचीन विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को भूलते जा रहे हैं, तथा पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण करते जा रहे हैं। अक्सर देखा जाता है कि हम देशी की अपेक्षा कर विदेशी को प्राथमिकता देते हैं….फिर चाहे बात कपड़ों की हो या विज्ञान की, हमें खुद की बनाई हुई चीजें कम पसन्द आती हैं या यूँ कहें कि खुद पर भरोसा ही नहीं। कई ऐसे प्रोडक्ट्स हैं जिनको बनाया तो भारत में जाता है परन्तु उनपर विदेशी ब्रांड्स के टैग्स लगा दिए जाते हैं, फिर क्या वही 500 रुपये की चीज 5000 में बिक जाती है हाथों हाथ।


Source: politico.eu

2018 की शुरुआत में, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक सभा को संबोधित करते हुए बौद्ध आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने कहा, “आधुनिक भारतीय प्राचीन विचारों की उपेक्षा कर रहे हैं। आधुनिक भारतीय बहुत पश्चिमी हो रहे हैं। आपको प्राचीन भारतीय ज्ञान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। आधुनिक भारतीय को अपने ज्ञान को नहीं भूलना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि, “भारत इस ग्रह पर एकमात्र देश है जो आधुनिक सुविधा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जोड़ सकता है। प्राचीन काल में, भारतीय हमारे गुरु थे, अब वे ‘चेला’ बन गए हैं, और पश्चिमी दुनिया उनकी गुरु बन गयी है। प्राचीन भारतीय ज्ञान के पुनरुद्धार की आवश्यकता है। भारत और बाकी देशों में एक बहुत बड़ा अंतर है। भारतीय ज्ञान और परंपराएं एक इंसान की आंतरिक शांति को नियंत्रित कर सकती हैं। आज, हमारे पास कई समस्याएं हैं जो भारत के प्राचीन ज्ञान और विज्ञान की मदद से हल हो सकती हैं।”

लेकिन हम ज्यादा विकसित दिखने के चक्कर में पश्चिमी परम्पराओं को अपनाते जा रहे हैं, हम हवन नहीं करते क्योंकि वो कूल(cool) नहीं है, हमें तिलक लगाना अच्छा नहीं लगता क्योंकि वो गांवठी है, हम योग नहीं, अब योगा करते हैं क्योंकि योग तो पिछड़ा हुआ है, योगा एकदम WOW लगता है…..हम दीवाली का विरोध करते हैं क्योंकि इससे प्रदूषण होता है परन्तु न्यू ईयर सेलिब्रेशन के नाम पर जमकर आतिशबाजियां करते हैं….हम अपनी ‘विश’ शिव जी को नहीं बताते (जबकि वे तो भोले हैं, सभी की मनोकामना पूरी करते हैं) बल्कि ‘सेंटा'(जो शायद कोरी कल्पना है) से कहते हैं…..

वस्तुत: हम भारतीय अपनी परम्परा, संस्कृति, ज्ञान और यहाँ तक कि महान विभूतियों को तब तक खास तवज्जो नहीं देते जब तक विदेशों में उसे न स्वीकार किया जाये। यही कारण है कि आज यूरोपीय राष्ट्रों और अमेरिका में योग, आयुर्वेद, शाकाहार, प्राकृतिक चिकित्सा, और सिद्धा जैसे उपचार लोकप्रियता पा रहे हैं जबकि हम उन्हें बिसरा चुके हैं। हमें अपनी जड़ी-बूटियों, नीम, हल्दी और गोमूत्र का ख्याल तब आता है जब अमेरिका उन्हें अपना लेता है। योग को हमने उपेक्षित करके छोड़ दिया पर जब वही ‘योगा’ बनकर आया तो हम उसके दीवाने बने बैठे हैं। पाश्चात्य संस्कृति में पले-बसे लोग भारत आकर संस्कार और मंत्रोच्चार के बीच विवाह के बन्धन में बँधना पसन्द कर रहे हैं और हमें अपने ही संस्कार दकियानूसी और बकवास लगते हैं।

भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री में एक दौर था जब भारतीय संस्कृति को खासी अहमियत दी जाती थी, परन्तु वह दौर अब ‘गुजरे जमाने की बेकार बातें’ हो चुका। आज जमाना हिप-हॉप और पॉप का है, जिसमें भारतीय संस्कृति कहीं फिट नहीं बैठती….एक समय था जब बच्चों की किताबों में मुंशी प्रेमचंद और आर्यभट्ट दिखा करते थे, आज उनकी जगह शेक्सपियर और आइंस्टीन ने ले ली है…..बुराई नहीं है कोई, विदेशी विद्वानों को पढ़ने या उनका अनुसरण करने में परन्तु अपनी जड़ों को काटना गलत है।

प्रधानमंत्री बनने से पहले पुणे के जाने-माने फर्ग्यूसन कॉलेज में छात्रों को सम्बोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने भी इस बात की ओर इशारा करते हुए कहा था कि – “भारत को आधुनिकीकरण की आवश्यकता है, पश्चिमीकरण की नहीं।” बात साधारण लगती है परन्तु बहुत गहरी है, वास्तिवकता में हम पश्चिमीकरण को ही आधुनिकता मान बैठे हैं…..जबकि हम अपनी संस्कृति और परम्पराओं को साथ में लेकर भी आधुनिक हो सकते हैं! युवाओं को यह समझना होगा कि जस्टिन बीबर और माइकल जैक्सन ने बड़ा बनने या कूल दिखने के लिए अपनी संस्कृति को नहीं छोड़ा….याद रखो जब तक जड़ों से जुड़े हो अस्तित्व में हो, जड़े कटने के बाद दरख़्त मर जाया करते हैं।

[zombify_post]


What's Your Reaction?

समर्थन में
3
समर्थन में
विरोध में
0
विरोध में
भक साला भक साला
1
भक साला
सही पकडे हैं सही पकडे हैं
1
सही पकडे हैं