आखिरकार संजीव पुनाळेकर वकील के तौर पर ‘हिंदुत्ववादी अभियुक्तों को पैरवी क्यूँ करते हैं? हिन्दू नेशन बनाने की बात संवैधानिक है? वे प्रशांत भूषण की तरफदारी कर सकते है लेकिन ये तरफदारी नरेंद्र दाभोलकर को नहीं दी जा सकती. उनकी गिरफ़्तारी की बात करने वाले एनसीपी के विधायक जितेंद्र आव्हाड के वो एक पाखंडी करार क्यूँ देते हैं? फडणवीस सरकार से उनका विरोध क्यूँ हैं? ऐसी तमाम बातें पिछले साल सितम्बर में मुंबई से छपने वाले अंग्रेजी अख़बार ‘आफ्टरनून वॉइस’ के संवाददाता मोहित सोमन को दिए एक इंटरव्यू के दौरान निकल कर आयी जिसका इंटरव्यू का हिंदी में अनुवाद किया गया है. तब ये इंटरव्यू वी नीड हिन्दू रेवोल्यूशन तो एक्सप्रेस डिसेंट टू अंबेडकर’ के हैडलाइंस से छपा था.

गौरतलब है कि नरेंद्र दाभोलकर मर्डर केस की जाँच कर रही सीबीआई ने पिछले हफ्ते शनिवार को मुंबई से मशहूर लॉयर एक्टिविस्ट संजीव पुनाळेकर को ‘सबूत मिटाने में मदद’ करने के आरोप पर अचानक गिरफ्तार कर लिया. हालाँकि वे इस केस की पैरवी भी कर रहे थे. संजीव पुनाळेकर पिछले कई सालों से सनातन संस्था समेत कई हिन्दू संगठनों से जुड़े अभियुक्तों के केसेज लड़ते रहे हैं. कई भ्रष्टाचार और घोटालों को उजागर करने के साथ-साथ इशरत जहां एनकाउंटर केस में गुजरात के पूर्व डीआईजी के वंज़ारा के भी वकील रह चुके हैं. ऐसे में जब संजीव पुनाळेकर की गिरफ्तारी पर डिबेट्स जोरों पर तो ये इंटरव्यू पढ़ना जरूरी हो जाता है. सवाल-जबाब आगे –

आपको क्यूँ लगता है कि केवल सनातन संस्था और साथ में, हिंदू जनजागृती समिति को सी.बी.आई और ए.टी.एस द्वारा दाभोलकर, पंसारे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश इन सभी की हत्या के लिए टारगेट किया जा रहा है? 

ठाणे-वाशी विस्फोट मामले के ट्रायल कोर्ट ने फैसला देते वक्त इस बात को ऑब्ज़र्व करते हुए जोर देकर कहा था कि सनातन संस्थान किसी भी तरीके से इसमें शामिल नहीं है. बल्कि इसके विपरीत कोर्ट द्वारा सबूत गढ़ने के लिए ए.टी.एस की कड़ी भत्सर्ना की गयी है. आखिरकार, छः आरोपीयों में से दो को केवल विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था और अन्य चार आरोपी बरी कर दिए गए थे. जो दोषी पाए गए उन्हें भी बाद में बेल पर रिहा कर दिया गया है और उनकी अपील अभी हाईकोर्ट में पेंडिंग है. (गौरतलब है कि 2008 में मुंबई के पास ठाणे और वाशी में ब्लास्ट के पीछे पहली बार सनातन संस्था से जुड़े लोगों की भूमिका जताई गयी थी)

डिट्रिक्ट और मजिस्ट्रेट कोर्ट के सभी पुराने और अभी चले रहे कैसेज को ऑफिशियल वेबसाइट्स देखा जा सकता है. आप पाएंगे कोई भी केस नहीं है जिसमें सनातन संस्था को दोषी करार दिया गया है. इसीलिए यह कभी भी नहीं कहा जा सकता कि सनातन संस्था गैर-कानूनी और आपराधिक गतिविधियों में शामिल है.

हिंदू नेशनलिस्ट्स को कानूनी मदद देने के पीछे आपका मकसद रहा है? 

पहली बात, कोई भी बेक़सूर फाँसी के तख्ते तक नहीं पहुँचने चाहिए. दूसरी तरफ, यदि कोई कसूरवार ठहराया जाता है, तो भी वह संविधान के तहत कानूनी मदद पाने का हक़दार है. एक व्यक्ति दोषी साबित होने तक निर्दोष समझा जाता है. हत्या एक अपराध है और उसे दंडित अवश्य किया जाना चाहिए. मगर जब एक बलात्कारी, माना,  मुस्लिम समुदाय से तालुक्क रखता है और गुस्साई भीड़ के बलात्कार के लिए उसकी हत्या कर देती है, तो आप इसे ‘कम्युनल लींचिंग’ नहीं कह सकते हैं. यही दाभोलकर मर्डर केस पर भी लागू होता है और लोगों को सच जानना चाहिए. लेकिन इसके साथ ये भी होना चाहिए, जिस व्यक्ति का मर्डर हुआ है, उसके सम्बन्धी मर्डर के कयासों के लिए हुक्मनामी नहीं कर सकते और एक झूठा इतिहास रचकर हिस्ट्री गढ़कर मृतक का महिमामंडन भी नहीं कर सकते. कई लोग झूठी आशा में इस प्रोपेगेंडा को बढ़ाने-चढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं कि एक बार सनातन पर प्रतिबंध लग जाए और वे बिना महसूल के निकल लेंगे.

आपको क्या लगता है कि आपकी गिरफ्तारी के लिए एनसीपी के विधायक जितेंद्र आव्हाड की मांग करने के पीछे उनके क्या इरादे हैं?  

ये वो शख्स हैं जिन्होंने इशरत जहां का महिमामंडन किया था. उन्होंने कभी भी आजाद मैदान के दंगों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की गिरफ्तारी की मांग नहीं की. इसलिए, उनके बयान पर टिप्पणी करना उनको बेवजह अहमियत देना होगा. इस बात का इन्वेस्टिगेशन करना जरूरी है कि उनका मास्टरमाइंड कौन है और वह पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया जैसे संगठनों के खिलाफ बात करने से हिचकिचाहते क्यूँ हैं?

आपको क्यूँ लगता है कि सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर के नाम दाभोलकर-हत्या के मामले में घसीटे गए हैं, जबकि इन दोनों के नाम पिछली सीबीआई चार्जशीट में शामिल नहीं थे?

(इस मामले में) जब से सारंग और विनय के सम्बन्ध में सीबीआई के पिछले फरेब का खुलासा हुआ है, ऐसा लगता है कि सीबीआई जल्दबाजी में कुछ निर्दोष युवाओं को फाँसी के लिए भेजकर उच्च-न्यायालय को खुश करने के फ़िराक में है. पिछले तीन वर्षों से सीबीआई खुद रचे गए झंझट से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है. फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए स्कॉटलैंड यार्ड को अप्रोच करने के मामले में जिस तरीके से उन्होंने हाईकोर्ट  को बेवकूफ़ बनाया और गुमराह किया, कृपया उसे याद करें!

दाभोलकर, पंसारे और लंकेश की हत्या के केस में सनातन कैसे शामिल है?

महिलाओं, बच्चों, शिशुओं और सीनियर सिटीजन्स सहित सैकड़ों परिवार सनातन आश्रमों में रहते हैं. मैं कभी भी यह कल्पना नहीं कर सकता कि सनातन किसी भी आपराधिक कृत्य में शामिल हो सकता है, किसी भी हत्या को अलग छोड़ दें.

गोवा, मडगाँव, मालेगाँव बम ब्लास्ट के बाद हरेक राजनीतिक दल सनातन पर प्रतिबंध लगाना चाहता है. आप इस पर क्या टिप्पणी करना चाहेंगे?

कांग्रेस-एनसीपी-सीपीआई-सीपीएम-एमआईएम एक गठबंधन है. वे एक समुदाय विशेष के लिए वोट बैंक की राजनीति करते हैं. इनमें से प्रत्येक पक्ष आरएसएस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग करता है. उनमें से किसी ने भी रजा अकादमी पर प्रतिबंध लगाने की मांग नहीं की है. ये पार्टियाँ खुद कश्मीर घाटी में काम कर रहे आतंकवादी संगठनों की समर्थक हैं. उन लोगों के ब्यौरों को देखें जो पीएफआई के एक्टिविस्ट्स थे और आतंकवादी कृत्यों में शामिल थे. इन राजनीतिक दलों में से किसी ने भी पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की मांग नहीं की. ऐसे में उन्हें गंभीरता से क्यों लेना चाहिए?

एक बार आपने कहा था कि एक हिंदू नेशन की डिमांड करने में ऐसा कुछ भी नहीं है संविधान के खिलाफ हो क्यूँकि ये हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है. चूंकि हमारा संविधान सभी धर्मों का समर्थन करता है, क्या आपको नहीं लगता कि आपका बयान संविधान के खिलाफ है? आपको ऐसा क्यों लगता है कि भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए?

भारत की परंपरा हिंदुत्व है. संवैधानिक तरीकों को अपनाकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना संभव है. यदि मार्क्सवादी “सर्वहारा क्रांति यानि प्रोलेटेरियन रेवोल्यूशन” का प्रचार कर सकते हैं और यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केवल “मतभेद” के संज्ञारूप में देखा जाता है, तो हम ‘हिंदू रेवोल्यूशन’ की मांग क्यूँ नहीं कर सकते और क्यूँ हम हमारे “अम्बेडकर (संविधान) से असहमति” को व्यक्त नहीं कर सकते?

लिबरल्स और रेशनलिस्ट्स में से हर कोई ‘हिंदू आतंकवादियों’ के पीछे ‘मास्टरमाइंड’ खोजने की कोशिश कर रहा है. आरएसएस के करीबियों में से हर कोई अब ‘अर्बन  नक्सलवाद’ के पीछे मास्टरमाइंड खोजना चाहता है. मुझे, व्यक्तिगत और मेरे संगठन के सचिव के तौर पर, बहुत ख़ुशी होगी यदि अगर फडणवीस द्वारा ‘सिंचाई घोटाले’ के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ को खोजते हैं और मजिस्ट्रेट के सामने ‘बुरके’ में पेश करते हैं तो.

ऐसा आरोप लगाया गया है कि पांच एक्टिविस्ट्स की हालिया गिरफ्तारियाँ और अर्बन नक्सलवाद से उनका संबंध, यह सनातन को बचाने के लिए ध्यान हटाने की रणनीति है?

यह सवाल मुख्यमंत्री फडणवीस से पूछा जाना चाहिए क्यूँकि उनकी सरकार ने गिरफ्तारियों को प्रभावित किया है. लिबरल्स और रेशनलिस्ट्स में से हर कोई ‘हिंदू आतंकवादियों’ के पीछे ‘मास्टरमाइंड’ खोजने की कोशिश कर रहा है. आरएसएस के करीबियों में से हर कोई अब ‘अर्बन  नक्सलवाद’ के पीछे मास्टरमाइंड खोजना चाहता है. मुझे, व्यक्तिगत और मेरे संगठन के सचिव के तौर पर, बहुत ख़ुशी होगी यदि अगर फडणवीस द्वारा ‘सिंचाई घोटाले’ के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ को खोजते हैं और मजिस्ट्रेट के सामने ‘बुरके’ में पेश करते हैं तो. मैं यह जानने में असमर्थ हूँ कि पुलिस, जो हैदराबाद और दिल्ली में छापा मार सकती है, वो क्यूँ इस मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए बारामती तक नहीं पहुंच सकती? यदि फडणवीस ऐसा करते हैं, तो वे महाराष्ट्र के वंचित वर्ग (किसान, मजदूर, दलित इत्यादि) के दिल जीत लेंगे जो बारामती के सिंचाई माफिया से पीड़ित है. मैं यहां मुख्यमंत्री फडणवीस की राजनीतिक चालबाज़ियों का शिकार होने नहीं आया हूँ और ना ही वरवरा राव की गिरफ्तारी का आनंद लेने आया हूँ जिनको मैं व्यक्तिगत रूप से पसंद करता हूँ और सम्मान करता हूँ. यदि प्रशांत भूषण भी सनातन संस्थान के खिलाफ बोलते हैं, तब भी मैं प्रशांत भूषण के बारे में बदजुबान बोलने वाला आखिरी व्यक्ति रहूँगा क्यूँकि मैं उन्हें एक सच्चे योद्धा मानता हूं. (लेकिन मैं इस सम्मान का विस्तार दाभोलकर या पानसरे जैसे व्यक्तियों के लिए नहीं कर सकता, मैं स्पष्ट रूप से यह स्वीकार करता हूँ). यदि फडणवीस को अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो मुझे लगता है कि वारवरा राव को गिरफ्तार करने के बजाय ‘एल्गार’ और ‘भीमा कोरेगांव’ पीछे के असली मास्टरमाइंड जो कि बारामती में रहते हैं, वो गिरफ्तार होने चाहिए और जेल में ठूंस देना चाहिए. लेकिन फडणवीस अपनी राजनीतिक मजबूरियों के कारण यह करने में असमर्थ हैं.

कौन से केसेज आपको काम करने के लिए ज्यादा प्रभावित करते हैं ? सहकारी, भ्रष्टाचार से सम्बंधित या आपराधिक मामलें?

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरा संगठन, ‘हिंदू विधिज्ञ परिषद’ अक्सर कथित हिंदू कार्यकर्ताओं से जुड़े ‘क्रिमिनल केसेज’ के संदर्भ में ही लाइमलाइट में आता है. हमने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कई शिकायतें दायर की हैं और पिछली सरकारों और वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार को पर्दाफाश करने के लिए याचिकाएं भी दायर की हैं. भ्रष्टाचार से लड़ने में हमारा काम बहुत अधिक विशालकाय है और मुझे डर है कि शायद हमारे खिलाफ मुख्यमंत्री फडणवीस के गुस्साए होने का यही कारण है.

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